Tuesday, December 23, 2008

तमन्‍ना


मैं जलता सूरज हूं
सीने में आग है
फिर भी होठों पर है मुस्‍कान
मैं हँसते-हँसते
कांटों को चुन रहा हूं
गुलाब को पाने की तमन्ना में।

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