Tuesday, December 23, 2008

चुनौती


हादसों से टकराना मेरी आदत है
संघर्षो से दोस्‍ताना मेरी इबादत है
नाकामियोंसे आंसू बहाना मुझे नहीं आता
अपनी हालत पर में क्‍यों गिलश्किवा करूं
मरते दम तक मैं हंस्‍ते ही जीवूं
वक्‍त चाहें कुछ भी कर लें
जीने से कभी हार न पाऊं।
जीना अगर मौत भी होतो
हंसते हंसते गले लगालू।
सच हो या झूठ फनाह हो या गुनाह
बस जिंदगी को चुनौती बनालू।

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