तबादला
यादें तुम्हारी सांसें बन गयी
उसूल लकीर बन गयी
तुम थी मेरे साथ
लाख मुसीबतों को भी
सह लिया है मैं ने
तुम्हारे साथ सारी खुशियां भी चली गयी
मर कर भी हम जी जान से जी लेते थे पहले
अब जी कर भी हर रोज,
ज़ीने के लिए मर रहे हैं
क्यों मेरे साथ ऐसा हुआ
सोचते-सोचते महीने साल भी बदल गये
और साल भी कैलंडरो से निकलगयें
लेकिन आपकी यादे मेरे दिल में
घर बनाकर रह गयी।
यादें तुम्हारी सांसें बन गयी
उसूल लकीर बन गयी
तुम थी मेरे साथ
लाख मुसीबतों को भी
सह लिया है मैं ने
तुम्हारे साथ सारी खुशियां भी चली गयी
मर कर भी हम जी जान से जी लेते थे पहले
अब जी कर भी हर रोज,
ज़ीने के लिए मर रहे हैं
क्यों मेरे साथ ऐसा हुआ
सोचते-सोचते महीने साल भी बदल गये
और साल भी कैलंडरो से निकलगयें
लेकिन आपकी यादे मेरे दिल में
घर बनाकर रह गयी।
No comments:
Post a Comment