Wednesday, June 10, 2009

वीराने जिंदगी

वीराने जिंदगी

कोई भूल नहीं सकता
जो दिल की, धड़कन बनने के बाद
कैसे याद नहीं कर सकता
आखों में तस्वीर उतरने के बाद
क्‍यों हमसे विदा हुई
कैसे हमसे बिछुड़ गयी
क्या हमारी खता थी
तकदीर का खेल कैसा था
सब कुछ पलभर में बदल गया
जीवन खंडहर हो गया
हाय! कैसे हम ‍तुम्हें भूल पायेंगे
इस बेड़े को कैसे पार कर जायेंगे
बार बार क्‍यों याद आती हो ?
हमें तड़पाके क्‍यों चली जाती हो ?
तुम्हारे साथ हमारा जीवन
ऐसे बिदा हुआ
जैसे सुनामी ने
जहां की नज़ारों को सूना कर दिया
मंजिल हमारी वीरान हो गई
हर रोज आंसू बहाने की आदत सी पड़ गई
अब दिल को हलका कर, चेन्‍नै बखश ने का
तरीका तो मिल गया
अब कोई नहीं हमारे आँसू पोछनेवाले
आँसुओं की धारा से
सीना हमारा जल गया।
पहले गालों पर खुशी के आँसू रुकते थे तो
शबनम से चमकते थे।
लेकिन अब वो छालों में बदल गये
हमने ‍प्यार को वफा माना था
तुमसे रिश्‍ता जोड़के
लेकिन ‍वक्त ने हमसे बेवफाई की
ऐसा कभी न सोचना था
कोई मिलने आता नहीं अपना
प्यार से बातें करता नहीं अपना
तुम्हा‍रे जाने के बाद ।
हमारे हाल दिल से
किसी को क्‍या वास्‍ता
अब तो रिश्‍ते - नाते तो बने हैं
एक मतलब सा
आंसुओं की गर्दिश
जिंदगी के बाद क्‍या कोई सोचेगा ?
फिर जनम लेने की बात !
जब इस दुनिया में ही खयामत है तो
खुद की आखों से जहन्‍नुम को देखा है तो
आगे की जिंदगी के बारे में सोचेगा ?
काश ! इस दुनिया को कोई भुला नहीं सकता
और भूलकर भी जी नहीं सकता है क्‍या
नहीं ....... नहीं कभी नहीं
हरगिज़ नहीं ।